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सोमवार, 14 दिसंबर 2020

खसरा और खतौनी में क्या अंतर है?

खसरा किसे कहते हैं?

खसरा  भारत में कृषि से संबंधित भूमि का एक कानूनी रिकॉर्ड या दस्तावेज है। इस दस्तावेज़ में किसी विशेष भूमि के बारे में कई जानकारी जैसे:- कि ज़मींदार का नाम, क्षेत्र, उस पर उगाई गई फसल का विवरण आदि दिए जाते हैं। खसरा वास्तव में मूल भूमि रिकॉर्ड है जिसमें भूमि के मालिक की खसरा संख्या और भूमि का क्षेत्र और कई अन्य विवरण शामिल हैं। खसरा जमीन के मालिक के साथ-साथ जमीन के क्षेत्रफल, जमीन की सीमा, उगाई गई फसल, मिट्टी के बारे में जानकारी प्रदान करता है। खसरा का उपयोग शाजरा नामक एक अन्य दस्तावेज के साथ किया जाता है, जो पूरे गांव का नक्शा देता है। इस मानचित्र पर, उस गाँव की सभी भूमि के मालिकों का विवरण रखा गया है। खसरा एक तरह से जमीनी रिकॉर्ड की इकाई है। प्रत्येक खसरा में एक संख्या होती है जो इसे पहचानती है।
भारत और पाकिस्तान में खसरा का इतिहास बहुत पुराना है और यहाँ खसरा अंग्रेजों से भी पहले पाया जाता है। भारत और पाकिस्तान के इतिहास के बारे में कई जानकारी इन खसरों से भी प्राप्त होती है।

खसरा मूल भू- अभिलेख है जिसमें भूमिस्वामी की भूमि का खसरा नम्बर एवं क्षेत्रफल रहता है और अन्य जानकारी रहती है। यह खसरा ,नम्बर अनुसार रहता है जैसे -
  1. खसरा नम्बर-1- रकवा -2•000 हेक्टेयर- भूमिस्वामी जगतधारी
  2. खसरा नम्बर-2– रकवा-3•040हेक्टेयर-भूमिस्वामी वंशधाकाल
  3. खसरा P-II फॉर्म में बनता है इसमें 12 कालम होते हैं।

प्रारूप-



जबकि खतौनी सहायक भू -अभिलेख है जिसमें किसी एक भूमिस्वामी के सारे खसरों का एक जगह पर ब्यौरा होता है।
खतौनी B-1 फॉर्म में बनता है, इसमें 23 कालम होते हैं।
प्रारूप-
खसरा ज़मीनी रेकोर्ड की एक इकाई है जो इसकी संख्या नम्बर से पहचानी जाती है।

 खतौनी वह रेजिस्टर है जिसमें प्रत्येक खसरा नम्बर के मालिक का नाम लिखा होता है।

 सौदे में हर नाम के बदलने पर नए मालिक का नाम दर्ज कर दिया जाता है 

यानि ‘ख़ता’ दिया जाता है इसलिए इस रेजिस्ट्र को खतौनी कहते हैं।


















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